Monday, April 25, 2011

सत्य साईं बाबा

सत्य साईं बाबा ,
मैं सत्य साईं बाबा के निधन पर अपनी शर्दा सुमन अर्पित करता हूँ, तथा उनके जनकल्याण व् समाज को ऊपर उठाने के लिय किये कार्यों को कोटि-कोटि नत-मस्तक करता हूँ। इसे बाबा की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। हमारा प्रयास यह होना चाहिय की उनके बताएं आदर्शों पर चलें। समाज में इसे महान व्यक्ति की भरपाई होना बहुत मुश्किल है।
एक बार पुंन श्रदांजलि अर्पित करीता हूँ।
भजन सिंह घारू

Tuesday, April 19, 2011

भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार,
यह बहुत बड़ी बीमारी है। इसे ख़त्म करने के लिए जो कदम उठाये जाएं वो कम होंगे । पहले तो हमें अपनी गलत सोच को सही व् तथ्यताम्क बनाना होगा। इस में एक आदमी से कुश होने वाला नहीं है। सब बात नियत की है, नियत अगर साफ होगी तो भ्रस्ताचार खत्म होगा अन्यथा यह खली पुलाव की तरह ही होगा। सब लोग इमानदारी से काम करें तो कुश करने की जरूरत नहीं होगी। सब को एक साथ मिल कर चलना होगा। तब यह बीमारी जड़ से ख़त्म हो सकती हैं। एक अन्ना किस-किस से उलझेगें। सब अगर साथ होगे तो २-४ वो भी किनारे लग जायगें।
जय हिंद! जय भारत।
द्वारा-भजन सिंह घारू

Wednesday, April 6, 2011

धार्मिक चिन्य

धार्मिक चिन्य , मैं हर चीज की कद्र करता हूँ क्योंकि हर चीज अपना महत्व रखती है। खाश तौर पर आज मैं धार्मिक चिन्य के बारे में कुश कहना चाहता हूँ , मैं नहीं समझता की इस में kइसी का कोई अहित होगा । धार्मिक चिन्य किसी भी धर्म के हों सब समाननीय हैं ,पर उनका प्रयोग वहासह्य या धंधे के रूप में होने लगे तो गलती हो सकती है। इस बात को लोगों को समझाने की है। की वे धार्मिक चिन्य बनियान आदि या पहनने वाले कपड़ों पर न बनायं, वह कपड़ा पेरों के निचे तथा कभी-कभी हम उन को अपने निचे भी रख लेतें हैं। जिससे उन धार्मिक चिन्याओं का अनादर होता है। यहाँ तक भी संभव है की हम उसमें गन्दी चीजें भी साफ कर जातें हैं। मैं अपने ब्लॉग के माद्यम से सभी लोगों से अपील करता हूँ की वे कृपय ऐसा न करें जिससे अपने धरम का अनादर हो। विनीतकर्ता-भजन सिंह घारू